You are here

Class 11 Economics Chapter 5-Presentation of Data-Textual and Tabular presentation

Class 11 Economics Chapter 5-Presentation of Data-Textual and Tabular presentation

अध्याय 5आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण: पाठ्य एवं सारणीयन प्रस्तुतीकरण

Presentation of Data : Textual and tabular presentation

 

आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Presentation of Data

आँकड़ों के व्यवस्थितिकरण के बाद आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता होती है। आंकड़ों के प्रस्तुतीकरण से यह अभिप्राय है कि आंकड़ों को स्पष्ट तथा व्यवस्थित रूप से इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि उन्हें सभी व्यक्ति सरलतापूर्वक समझ सके और उनसे उचित परिणाम निकाल सके।   आंकड़ों के प्रस्तुतीकरण के मुख्य तीन प्रकार हैं-

  1. पाठ्य या वर्णनात्मक प्रस्तुतीकरण
  2. सारणीयन प्रस्तुतीकरण
  3. चित्रीय प्रस्तुतीकरण

 

1- पाठ्य प्रस्तुतीकरण Textual Presentation of Data

पाठ्य प्रस्तुतीकरण में आंकड़े अध्ययन के पाठ्य का एक अंश या अध्ययन की विषय वस्तु के वर्णन का एक अंश होते हैं। इस प्रकार का प्रस्तुतीकरण आंकड़ों का वर्णनात्मक प्रस्तुतीकरण भी कहलाता है। जब आंकड़ों की संख्या ज्यादा ना हो तो आंकड़ों के प्रस्तुतीकरण की यह सर्वमान्य विधि है। संक्षेप में, पाठ्य प्रस्तुतीकरण में आंकड़ों को सरल वाक्यों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उदाहरण-

  • हरियाणा में कपड़े बनाने की एक कंपनी में हड़ताल हुई और 50% कर्मचारी अवकाश पर रहे।
  • कल की ऑनलाइन कक्षा में 50 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

 उपयुक्तता

आंकड़ों का पाठ्य प्रस्तुतीकरण तब ज्यादा उपयुक्त रहता है जब आंकड़ों की संख्या अधिक न हो। यदि अध्ययन की विषय वस्तु के रूप में प्रस्तुत आंकड़ों का आकार छोटा हो तो पाठ्य प्रस्तुतीकरण एक अच्छी विधि होती है।  

दोष

आंकड़ों के पाठ्य प्रस्तुतीकरण की सबसे गंभीर समस्या यह है कि किसी व्यक्ति को मात्रात्मक तथ्यों को पाठ्य के पूर्व में ही पढ़ना पड़ता है। इसके विपरीत आंकड़ों को यदि चित्र या दंडों के रूप में प्रस्तुत किया जाए तो एक नजर डाल कर भी हम काफी सूचनाएं एकत्रित कर सकते हैं। जबकि आंकड़ों के पाठ्य प्रस्तुतीकरण में पूरा पाठ पढ़ना और ग्रहण करना आवश्यक होता है।  

2- सारणीयन प्रस्तुतीकरण (Tabular Presentation of Data)

जब आंकड़ों को सारणी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है तो इसे आंकड़ों का सारणीयन प्रस्तुतीकरण कहा जाता है। अर्थात जब संख्यात्मक आँकड़ों को स्तंभों (Columns) और पंक्तियों (Rows) के रूप में प्रस्तुत किया जाता है तो यह आँकड़ों का सारणीयन प्रस्तुतीकरण कहलाता हैं।  

नीसवेंजर के अनुसार, “एक सांख्यिकीय सारणी, आंकड़ों को स्तंभों तथा पंक्तियों के रूप में व्यवस्थित संगठन है।”  

प्रोफेसर एम एम ब्लेयर के अनुसार, “सारणीयन विस्तृत अर्थों में कालमों तथा पंक्तियों के रूप में आंकड़ों की क्रमबद्ध व्यवस्था है।”  

(Class 11 Economics Chapter 4-Presentation of Data-Textual and Tabular presentation.)  

 

एक सारणी के भाग (Components of a Table)

एक सारणी के भाग

1- सारणी की संख्या (Table number)

सारणी को सबसे पहले एक क्रम संख्या अर्थात 1,2,3, आदि दी जानी चाहिए। एक अनुसंधान में तालिका एक जिस क्रम से बनाई जाती है, उसी के अनुसार उनकी संख्या दी जानी चाहिए। सारणी संख्या से उन्हें ढूंढने में सहायता मिलती है तथा उनका उल्लेख सरलता से किया जा सकता है।  

2- शीर्षक (Title)

प्रत्येक सारणी में संख्या के बाद सबसे ऊपर उसका शीर्षक दिया जाना चाहिए। शीर्षक मोटे अक्षरों में लिखा जाना चाहिए ताकि तुरंत ही ध्यान आकर्षित हो सके। शीर्षक सरल स्पष्ट और छोटा होना चाहिए। शीर्षक इतना स्पष्ट होना चाहिए कि उसे पढ़ते ही सारणी के बारे में ज्ञान हो जाए कि यह किससे संबंधित है।  

3- शीर्षक टिप्पणी (Head Note)

यदि शीर्षक में पूरी सूचना देना संभव नहीं हो तो उसके तुरंत नीचे शीर्ष टिप्पणी दी जाती है। इसमें वह अतिरिक्त सूचना दी जाती है जो शीर्षक में नहीं दी जा सकती।  

4- पंक्ति शीर्षक (Stubs)

सारणी की पंक्तियों के शीर्षक को पंक्ति शीर्षक कहा जाता है। इसके द्वारा सरल भाषा में यह ज्ञात हो जाता है कि पंक्तियों द्वारा क्या प्रकट किया जा रहा है।  

5- उपशीर्षक (Caption)

सारणी के स्तंभों के शीर्षक को उपशीर्षक कहा जाता है। इसके द्वारा यह ज्ञात होता है कि प्रत्येक कॉलम में कौन-कौन से आंकड़े दिखाए जा रहे हैं। उपशीर्षक के अंतर्गत कई अन्य शीर्षक भी हो सकते हैं।  

6- कलेवर या क्षेत्र (Body or Field)

सारणी का सबसे महत्वपूर्ण भाग क्षेत्र या कलेवर कहलाता है। इसके द्वारा सारणी में दी गई सारी सूचना को दिखाया जाता है। प्रत्येक आंकड़ों को कॉलम तथा पंक्ति द्वारा बनाए गए खाने (Cells) में अलग-अलग लिखा जाता है।  

7- टिप्पणी (Footnotes)

सारणी में दिए गए आंकड़ों के स्पष्टीकरण के लिए टिप्पणी देने की आवश्यकता होती है। यह टिप्पणी सारणी के नीचे लिखी जाती है। टिप्पणी तभी दी जानी चाहिए जब कोई आंकड़े यह सूचना स्पष्ट ना हो या उसके विषय में कोई विशेष अतिरिक्त सूचना देनी हो।  

8- स्रोत (Source)

यदि सारणी में द्वितीयक आंकड़ों को प्रकट किया गया है तो उन आंकड़ों के स्रोत अर्थात वे आंकड़े कहाँ से लिए गए हैं, सारणी के नीचे लिखा जाता है। स्रोत के विषय में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए जैसे उसका नाम, प्रकाशन वर्ष, पृष्ठ संख्या, प्रकाशक का पता आदि।

(Class 11 Economics Chapter 4-Presentation of Data-Textual and Tabular presentation.)

एक अच्छी सारणी के संबंध में सुझाव या अच्छी सारणी की विशेषताएं (Features of a good Table)

एक अच्छी सारणी बनाने के लिए उसमें निम्न विशेषताएं होनी चाहिए-

1- शीर्षक अध्ययन के अनुकूल होना चाहिए

सारणी का शीर्षक सबसे ऊपर तथा बीच में दिया जाना चाहिए। यह अनुसंधान के उद्देश्य के अनुकूल होना चाहिए।  

2- तुलना

सारणी बनाते समय यह ध्यान में रखना चाहिए कि जिन संख्याओं की तुलना की जानी हो उन्हें एक दूसरे के पास वाले कॉलम या पंक्तियों में रखना चाहिए।  

3- विशेष महत्व

सारणी के कई महत्वपूर्ण तथ्यों को विशेष महत्व देने की आवश्यकता होती है। उन तथ्यों को सबसे ऊपर वाली पंक्ति या सबसे पहले कॉलम में लिखा जाना चाहिए। विशेष तथ्यों को कॉलम या पंक्ति में पंक्ति में मोटे अक्षरों के द्वारा प्रकट किया जाना चाहिए।  

4- आदर्श आकार

एक सारणी आदर्श आकार की होनी चाहिए। सारणी का आधार आकार तय करने से पहले उसका एक रफ ड्राफ्ट बना लेना चाहिए। इसके द्वारा यह तय किया जा सके सकता है कि कितनी पंक्तियां तथा कॉलम बनाए जाएं जिससे कि सारे आंकड़ों को प्रकट किया जा सके।  

5- पंक्ति शीर्षक

यदि पंक्तियां बहुत लंबी है तो सारणी के बाई और पंक्तियों के अनुशीर्षक दिए जाने चाहिए।  

6- शून्य का प्रयोग

सारणी में शून्य का प्रयोग केवल मात्रा की अनुपस्थिति दिखाने के लिए ही किया जाना चाहिए। यदि सामग्री उपलब्ध नहीं है तो इसके लिए (n.a) अथवा (-) या किसी अन्य शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए।  

7- शीर्षक

शीर्षक में जहां तक संभव हो एकवचन का प्रयोग किया जाना चाहिए। जैसे वस्तुओं के कॉलम में ‘वस्तु’ शब्द का प्रयोग अधिक उचित होगा न की ‘वस्तुओं’ शब्द का।  

8- संक्षिप्त शब्द

सारणी के शीर्षक तथा उपशीर्षक में संक्षिप्त शब्दों आदि का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।  

9- टिप्पणी

सारणी में आवश्यकता होने पर ही टिप्पणी दी जानी चाहिए। परंतु टिप्पणी को सारणी के आंकड़ों से संबंधित करने के लिए अंकों के स्थान पर चिन्हों जैसे (*) इत्यादि का उपयोग किया जाना चाहिए।  

10- इकाइयां

सारणी में उपयोग की गई इकाइयों के बारे में कॉलम के ऊपर या अनुशीर्षक के सामने लिखा जाना चाहिए।  यदि संख्या काफी बड़ी है तो उनके अंतिम अंको को हटाकर इस प्रकार लिखा जाना चाहिए जैसे लाख में, हजार में 000 टन इत्यादि।  

11- योग

सारणी के अध्ययन की सरलता की दृष्टि से सारणी के आंकड़ों के प्रत्येक वर्ग के लिए एक उप-योग तथा सभी संयुक्त वर्गों के लिए कुल योग लिखा जाना चाहिए।  

12- प्रतिशत तथा अनुपात

यदि आवश्यक हो तो सारणी में आंकड़ों के प्रतिशत या अनुपात भी अवश्य प्रकट किए जाने चाहिए।  

13- सन्निकटन की मात्रा

यदि सारणी में आंकड़ों को सन्निकट (Round Off) किया गया है तो वह किस अंक तक किया गया है, इसकी सूचना सारणी के ऊपर यह टिप्पणी में अवश्य देनी चाहिए।  

14- सामग्री का स्रोत

सारणी के नीचे यह अवश्य लिखा जाना चाहिए कि आंकड़े कहां से प्राप्त किए गए हैं। अर्थात आंकड़ों का स्रोत अवश्य प्रकट करना चाहिए।  

15- स्तंभों का आकार

स्तंभों का आकार प्राप्त सूचना, स्थान व अन्य खानों के आकार के अनुसार होना चाहिए।  

16- स्तंभों की व्यवस्था

स्तंभों को स्थान के अनुसार मोटी व हल्की रेखाओं द्वारा खानों (Cells) में बांट देना चाहिए। ताकि समझने में सरल हो।  

17- सरल, मितव्ययी और सुंदर

सारणी सरल होनी चाहिए। ताकि यह सुगमता से समझ आ सके और देखने में सुंदर लगे।

(Class 11 Economics Chapter 4-Presentation of Data-Textual and Tabular presentation.)  

 

सारणीयों के प्रकार (Kinds of Tables)

सारणियों को निम्न प्रकारों में बांटा जा सकता है-

1- उद्देश्य के अनुसार सारणी

            a) सामान्य उद्देश्य वाली सारणी

सामान्य उद्देश्य वाली सारणी वह सारणी है जो सामान्य प्रयोग के लिए आंकड़ों को प्रस्तुत करती है। इसका एकमात्र उद्देश्य आंकड़ों को इस प्रकार प्रस्तुत करना है कि अनुसंधानकर्ता अलग-अलग इकाइयों को तुरंत ढूंढ सके। यह सामान्यतः किसी रिपोर्ट के साथ दी गई होती है। उदाहरण के लिए भारत की जनगणना के साथ दी गई सारणी। इन्हें संदर्भ सारणी (Reference Table) भी कहा जाता है।

             b) विशेष उद्देश्य वाली सारणी विशेष उद्देश्य वाली सारणी वह सारणी होती है जो किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए बनाई जाती हैं। यह सारणी छोटे आकार की होती हैं। इनमें विस्तृत आंकड़े नहीं दिए जाते, बल्कि आंकड़ों के विश्लेषण के परिणाम दिए जाते हैं। इन्हें सारांश सारणी (Summary Table) भी कहा जाता है।  

2- मौलिकता के अनुसार सारणी

              a) मौलिक या प्राथमिक सारणी मौलिक सारणी वह सारणी है जिसमें आंकड़े उसी मौलिक रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं जिस रूप में वह एकत्रित किए गए थे।

              b) व्युत्पन्न सारणी व्युत्पन्न सारणी वह सारणी है जिसमें आंकड़े उसी रूप में प्रस्तुत नहीं किए जाते जिनमें वे एकत्रित किए गए थे, बल्कि वे अनुपात प्रतिशत आदि के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं।  

3- बनावट के अनुसार सारणी

             a) सरल या एक गुण वाली सारणी सरल सारणी वह सारणी है जो आंकड़ों की केवल एक ही विशेषता का वर्णन करती है। उदाहरण के लिए एक फैक्ट्री में मजदूरों को संख्या दर्शाने वाली सारणी।

              b) जटिल सारणी जटिल सारणी वह सारणी है जो आंकड़ों की एक से अधिक विशेषताओं को प्रकट करती है प्रस्तुत किए गए गुणों के आधार पर यह सारणी निम्नलिखित प्रकार की हो सकती है-

                i) द्विगुणी सारणी द्विगुणित सारणी वह सारणी है जो आंकड़ों की दो विशेषताओं को प्रकट करती है। उदाहरण के लिए एक फैक्ट्री में मजदूरों को स्त्री और पुरुष के रूप में दर्शाने वाली सारणी द्विगुणी सारणी कहलाएगी।

                 ii) त्रिगुणी सारणी त्रिगुणी सारणी वह सारणी है जो आंकड़ों की तीन विशेषताओं को प्रकट करती है। उदाहरण के लिए एक फैक्ट्री में मजदूरों को स्त्री और पुरुष तथा ग्रामीण या शहरी मजदूरों को दर्शाने वाली सारणी त्रिगुणी सारणी कहलाएगी।

                 iii) बहुगुणी सारणी बहुगुणी सारणी वह सारणी होती है जो आंकड़ों के तीन से अधिक गुणों को प्रकट करती है। उदाहरण के लिए एक फैक्ट्री में मजदूरों को स्त्री-पुरुष, शिक्षित-अशिक्षित, ग्रामीण-शहरी तथा विवाहित और अविवाहित आदि में प्रकट करने वाली सारणी बहुगुणी सारणी कहलाएगी।

(Class 11 Economics Chapter 4-Presentation of Data-Textual and Tabular presentation.)

आंकड़ों का वर्गीकरण और सारणीयन प्रस्तुतीकरण

Classification of Data and Tabular presentation

  सारणीयन प्रस्तुतीकरण आंकड़ों के चार प्रकार के वर्गीकरण पर आधारित है। यह है- गुणात्मक, मात्रात्मक, अस्थाई और स्थानिक। इन की व्याख्या निम्न प्रकार से की जा सकती है-  

1- आंकड़ों का गुणात्मक वर्गीकरण और सारणीयन प्रस्तुतीकरण-

जब आंकड़ों को एक प्रक्रिया के गुणात्मक लक्षणों या गुणात्मक विशेषताओं के रूप में वर्गीकृत करते हैं तो यह गुणात्मक वर्गीकरण होता है। उदाहरण के लिए बेरोजगारी के आंकड़ों को ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों, कुशल-अकुशल कर्मचारियों या पुरुष-स्त्री इत्यादि में प्रस्तुत किया जा सकता है।  

2- आंकड़ों का मात्रात्मक वर्गीकरण और सारणीयन प्रस्तुतीकरण

जब एक प्रक्रिया की मात्रात्मक विशेषताओं के आधार पर आंकड़ों को वर्गीकृत किया जाता है तो यह मात्रात्मक वर्गीकरण कहलाता है। उदाहरण के लिए हरियाणा बोर्ड परीक्षा परीक्षा में कक्षा बारहवीं के विद्यार्थियों द्वारा अर्थशास्त्र में प्राप्त अंकों के आंकड़े।  

3- आंकड़ों का अस्थाई वर्गीकरण और सारणीयन प्रस्तुतीकरण

अस्थाई वर्गीकरण में आंकड़े समय के अनुसार वर्गीकृत किए जाते हैं और समय एक वर्गीकृत चर बन जाता है। उदाहरण के लिए सन 2010 से लेकर 2020 तक देश में अनाज के उत्पादन संबंधी आंकड़े।  

4- स्थानिक वर्गीकरण स्थानिक वर्गीकरण में स्थान एक वर्गीकृत चर बन जाता है अर्थात इस विधि में आंकड़ों को किसी भौगोलिक स्थान के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है यह एक गांव एक शहर एक जिला या एक देश हो सकता है। उदाहरण के लिए विभिन्न राज्यों के जनसंख्या संबंधी आंकड़े।  

(Class 11 Economics Chapter 4-Presentation of Data-Textual and Tabular presentation.)

सारणीयन प्रस्तुतीकरण के गुण (Presentation of Data)

  सारणीयन द्वारा आंकड़ों के प्रस्तुतीकरण के मुख्य गुण निम्नलिखित हैं-

1- सरल तथा संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण

सारणी का उद्देश्य आंकड़ों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करना है जिससे उन्हें सरलता से समझा जा सके।  सारणी द्वारा अव्यवस्थित आंकड़ों को कम से कम स्थान में इस प्रकार संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत किया जा सकता है कि उनसे अधिक से अधिक सूचना प्राप्त हो सके।  

2- तुलना में सुविधा

सारणी द्वारा आंकड़ों को विभिन्न वर्गों में प्रस्तुत किया जाता है। इसलिए उनकी तुलना करना सुविधाजनक हो जाता है।  

3- सरल विश्लेषण

सारणी द्वारा आंकड़ों के विश्लेषण में सहायता मिलती है आंकड़ों को सारणी के रूप में व्यवस्थित करके ही माध्य, माध्यिका, अपकिरण के माप आदि ज्ञात किए जाते हैं।  

4- आंकड़ों की विशेषताएं स्पष्ट हो जाती हैं

सारणी द्वारा आंकड़ों की विशेषताएं स्पष्ट हो जाती है आंकड़ों को याद करना भी सरल हो जाता है।  

5- मितव्ययी

सारणी द्वारा आंकड़ों को कम स्थान में प्रस्तुत किया जाना संभव होता है। इसके फलस्वरूप समय और कागज की बचत होती है। आवश्यक आंकड़ों को आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।

Class 11 Economics Chapter 4-Presentation of Data-Textual and Tabular presentation.

You may also like to Visit : कक्षा ग्यारहवीं अर्थशास्त्र के नोट्स हिन्दी माध्यम में पढ़ने के लिए यह क्लिक करें।

You may also like to Visit : अर्थशास्त्र के विडिओ और लाइव क्लास जॉइन करने के लिए यहाँ क्लिक करें।

Leave a Reply

Top
%d