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Types of Economies and Solution of Central Problems

types of Economies and solution of central problems

Class :12 Micro Economics Unit-1 Chapter : 2(II) Topic : Types of Economies and solution of Central Problems.

विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में केंद्रीय समस्याओं का समाधान

विभिन्न प्रकार की अर्थव्यवस्थायें केंद्रीय समस्याओं का समाधान भिन्न-भिन्न तरीके से करती हैं। मुख्यतः अर्थव्यवस्थाओं को तीन भागों में बांटा जा सकता है।

DIFFERENT TYPES OF ECONOMIES

1-पूंजीवादी अर्थव्यवस्था या बाजार अर्थव्यवस्था (Capitalist/Market Economy)

Capitalist Economy

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था एक स्वतंत्र अर्थव्यवस्था होती है जिसमें उत्पादक यह निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होते हैं कि क्या, कैसे और किसके लिए उत्पादन किया जाए? पूंजीवादी अर्थव्यवस्था या बाजार अर्थव्यवस्था में आर्थिक क्रियाओं पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता। इस अर्थव्यवस्था में आर्थिक क्रियाएं बाजार शक्तियों (मांग व पूर्ति) की स्वतंत्र अंतर-क्रिया पर निर्भर करती हैं। उत्पादक अपना निर्णय बाजार की मांग और पूर्ति की शक्तियों के आधार पर लेते हैं। इस प्रकार के अर्थव्यवस्था का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है।

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में केंद्रीय समस्याओं का समाधान

पूंजीवादी या बाजार अर्थव्यवस्था में उत्पादक उन वस्तुओं का उत्पादन करेंगे, जिनकी मांग अधिक है और पूर्ति कम है। ऐसी वस्तुएं से उत्पादकों को अधिक लाभ प्राप्त होंगे। उत्पादक, उत्पादन के उन साधनों का प्रयोग करेंगे जिनसे उत्पादन की लागत कम से कम हो ताकि उन्हें अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके। एक स्वतंत्र अर्थव्यवस्था में उत्पादक उस वर्ग के लिए वस्तुओं का उत्पादन करेंगे जो अधिक कीमत देने में सक्षम है। क्योंकि इससे उत्पादकों को अधिकतम लाभ प्राप्त होगा। उदाहरण-अमेरिका, इंग्लैंड।

2-समाजवादी अर्थव्यवस्था या केंद्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था (Socialist/Centrally Planned Economy)

Socialist Economy

समाजवादी अर्थव्यवस्था या केंद्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था होती है, जिसमें आर्थिक क्रियाओं पर नियंत्रण किसी केंद्रीय अधिकारी या सरकार द्वारा होता है। इस अर्थव्यवस्था में क्या कैसे और किसके लिए उत्पादन किया जाए यह निर्णय सरकार द्वारा नियुक्त किसी केंद्रीय अधिकारी द्वारा लिया जाता है। इस प्रकार की अर्थव्यवस्था का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना नहीं होता अपितु अधिकतम सामाजिक कल्याण करना होता है

सामाजिक अर्थव्यवस्था या केंद्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में केंद्रीय समस्याओं का समाधान

समाजवादी अर्थव्यवस्था में ऐसी वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन किया जाता है जो सरकार के विचार में समाज के लिए सबसे अधिक उपयोगी हो। उत्पादन की ऐसी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है, जो समाज के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी हो। उदाहरण के लिए यदि समाजवादी अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी की स्थिति हो तो सरकार श्रम-प्रधान तकनीक का प्रयोग करती है ताकि अधिकतम लोगों को रोजगार प्राप्त हो। इस अर्थव्यवस्था में निर्धन लोगों के लिए भी पर्याप्त वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन किया जाएगा, भले ही इन वस्तुओं के उत्पादन से उत्पादको को कोई विशेष लाभ नहीं मिल रहा हो। इस अर्थव्यवस्था में अधिकतम लाभ की तुलना में सामाजिक न्याय को अधिक प्राथमिकता दी जाती है। जैसे- चीन, रूस, क्यूबा |

(Types of Economies and solution of Central Problems Notes in Hindi)

Mixed Economy

3-मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy)

मिश्रित अर्थव्यवस्था में पूंजीवादी अर्थव्यवस्था तथा समाजवादी अर्थव्यवस्था दोनों के गुण सम्मिलित होते हैं। इस प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक क्रियाओं को बाजार शक्तियों के स्वतंत्र पर छोड़ दिया जाता है, परंतु सरकार अर्थव्यवस्था तथा बाजार पर अपना नियंत्रण भी बनाए रखती है। इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में आर्थिक क्रियाओं के लिए निजी क्षेत्र को स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है, परंतु जन-कल्याण से जुड़े कुछ क्षेत्रों को सरकार अपने नियंत्रण में रखती है। इस प्रकार के अर्थव्यवस्थाओं का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ के साथ सामाजिक कल्याण में भी वृद्धि करना होता है

मिश्रित अर्थव्यवस्था में केंद्रीय समस्याओं का समाधान

मिश्रित अर्थव्यवस्था में क्या, कैसे और किसके लिए उत्पादन किया जाए यह निर्णय बाजार शक्तियों के साथ-साथ सामाजिक कल्याण के आधार पर भी लिया जाता है। कुछ क्षेत्रों में उत्पादक अधिकतम लाभ प्राप्ति के उद्देश्य से निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होते हैं, परंतु कुछ क्षेत्रों में सामाजिक कल्याण को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिए जाते हैं। उदाहरण भारत में अधिकतर क्षेत्रों में उत्पादकों को अपने लाभ अधिकतम करने के लिए स्वतंत्रता है, परंतु रेलवे, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा आदि जनकल्याण से जुड़े क्षेत्रों में सरकार का पूर्ण नियंत्रण है। ताकि समाज का निर्धन वर्ग भी रेलवे आदि की सेवाएं प्राप्त कर सकें ।

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